कोरोना की जंग जीतकर ही देखेंगे अपनी नवजात बेटी का मुंह,

दतिया / कोरोना के खिलाफ युद्ध में देश को बचाने के लिए दिन-रात ड्यूटी कर रहे ऐसे पुलिस कर्मचारी को बाकई सेल्यूट के हकदार हैं। इन्होंने अपने परिवार से पहले देश को महत्व दिया। इनमें से ही एक है जिले के भांडेर अनुभाग के पंडोखर थाने की कमान संभाल रहे सबइंस्पेक्टर अजय अम्बे। इन्हें 15 दिन पहले ही पिता बनने का सुख प्राप्त हुआ है। वहीं अपना फर्ज निभाने में लगे सबइंस्पेक्टर अम्बे अभी तक अपनी बेटी का मुंह तक नहीं देख पाएं है। करीब 22 दिनों से अपने परिवार से दूर हैं। वहीं इनका परिवार वर्तमान में ग्वालियर में रह रहा है। ग्रामीणों के स्वास्थ्य परीक्षण में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।


नन्हीं बेटी की आती है याद


अम्बे बताते हैं, कि इस दुनिया में आए हुए उनकी नन्हीं बेटी को 15 दिन से ज्यादा हो गए हैं। ऐसे में उससे न मिल पाने पर दुखी भी हो जाते हैं। लेकिन फिर वर्दी के फर्ज के आगे उन्हें सब कुछ भूलाकर सिर्फ अपने कर्तव्य की ही याद रहती है।


वीडियो कॉल से ले पाते हैं हालचाल


पंडोखर पुलिस थाने में पदस्थ युवा सब इंसपेक्टर थाना प्रभारी अजय अम्बे ड्यूटी के कारण बीते 22 दिन से अपने परिजनों से नहीं मिल पाए है। उनका परिवार 90 किमी दूर ग्वालियर शहर में ही रह रहा है। कोरोना जंग के चलते अजय अंबे सिर्फ मोबाइल से वीडियो कॉल पर ही पत्नी और अपने मम्मी-पापा से बात कर हालचाल पूछ लेते हैं। अजय अंबे बताते है,ं कि वैसे तो पत्नी ही हर रोज सुबह होते ही वीडियो कॉल कर उनका हाल पूंछ लेती हैं, लेकिन जब वह देर रात तक लौटते हैं तो खुद भी वीडियो कॉल से अपने परिवार के लोगों से बात कर लेते हैं। हमारे लिए पहले देश और फिर परिवार है। मैं कोराना को हराकर ही घर जाऊंगा ।