विधायकों की घेराबंदी में कांग्रेस-भाजपा की सियासी जंग तेज, बिसाहू की वापसी

भोपाल ।  मध्यप्रदेश सरकार गिराने और बचाने के खेल में पिछले कई दिनों से चल रही उठापटक के बीच रविवार को कांग्रेस विधायक बिसाहूलाल सिंह की भी वापसी हो गई। वह भोपाल में मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिले और अपनी बात रखी। अब भी दो कांग्रेस विधायक रघुराज सिंह कंषाना और हरदीप सिंह डंग की वापसी को लेकर संशय बना हुआ है। इस बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा विधायकों को घेरने में सक्रिय हो गई है। भाजपा की रणनीति जहां कांग्रेसी खेमे में सेंध लगाने की है, वहीं कांग्रेस भी इसी मोर्चे पर काम कर रही है। राज्यसभा की रिक्त तीन सीटों के लिए 13 मार्च तक नामांकन होने हैं। चुनाव 26 मार्च को होना है। नामांकन वापसी की तारीख तक सियासी हालात पर तस्वीर स्पष्ट होने संभावना है। उधर, देर रात मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली रवाना हो गए हैं।


बिसाहू को बेंगलुरु से वाया इंदौर लाए


रविवार शाम विधायक बिसाहूलाल सिंह को पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल बेंगलुरु से विमान में इंदौर लाए। यहां से बघेल व गृह मंत्री बाला बच्चन के साथ सरकारी विमान से वे भोपाल लौटे। भोपाल पहुंचते ही बिसाहूलाल मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिले तो भाजपा के विधायक नारायण त्रिपाठी भी सीएम आवास पहुंचे।


तीर्थयात्रा पर गया था: बिसाहू


बेंगलुरु से वापस लौटे कांग्रेस विधायक बिसाहूलाल सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मीडिया से कहा कि वे तीर्थ यात्रा करने गए थे। वे बोले कि मैं शुरू से कांग्रेस के साथ था और कांग्रेस के ही साथ रहूंगा। मुख्यमंत्री कमलनाथ को उनका पूरा समर्थन है। मंत्री बनाने का काम मुख्यमंत्री का है। हमें किसी ने बंधक नहीं बनाया था। उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु से शनिवार को लौटे सुरेंद्र सिंह शेरा ने भी कहा था कि उन्हें किसी ने बंधक नहीं बनाया था। इसके बाद शनिवार को ही वे दिल्ली चले गए थे और वहां से मुंबई होते हुए रविवार की रात को भोपाल लौटे। यहां उनकी मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात होनी थी, लेकिन सीएम के दिल्ली चले जाने से यह संभव नहीं हो सका।


 

बिसाहूलाल के बयान से उठे गुमशुदगी रिपोर्ट पर सवाल


बिसाहूलाल सिंह के परिजनों से लगातार बात होने के बयान से उनके बेटे द्वारा लिखवाई गई गुमशुदगी रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं। राजधानी के टीटी नगर थाने में बिसाहूलाल के बेटे ने गुमशुदगी रिपोर्ट लिखवाई थी। रविवार को दोपहर में जब टीटी नगर थाना प्रभारी संजीव चौकसे से नवदुनिया ने हाईप्रोफाइल व्यक्ति की गुमशुदगी रिपोर्ट पर कार्रवाई के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि थाने से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।


उनसे आसपास के जिलों या अन्य राज्यों को सूचना भेजने की बात पूछी तो उन्होंने इससे भी इनकार किया। पुलिस के संवेदनशील मामले पर इस तरह की कार्रवाई से गुमशुदगी रिपोर्ट कराए जाने और लिखे जाने पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।


बहुमत दिखाने के समय देखेंगे: त्रिपाठी


इधर, भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी एक बार फिर रविवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने पहुंचे तो मीडिया ने उन्हें घेर लिया। त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने मैहर जिला बनाने की मांग रखी है और सीएम से कहा है कि विंध्य प्रदेश का संकल्प पारित कराया जाए।


त्रिपाठी से जब पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि कांग्रेस सरकार को बहुमत है या नहीं तो उन्होंने पलटकर सवाल किया कि आपको नहीं लगता कि बहुमत में नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि जब बहुमत सिद्ध करने की बारी आएगी तो आप क्या करेंगे तो उन्होंने कहा कि बहुमत का समय आने पर वे देखेंगे। त्रिपाठी का इस तरह लगातार सीएम और विधानसभा अध्यक्ष नर्मदाप्रसाद प्रजापति से मुलाकात करने को लेकर भाजपा-कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है। उनका कांग्रेस खेमे में बार-बार जाना उनके नंबर गेम प्रबंधन की अहम कड़ी है।


दूसरी तरफ, सियासी घमासान के बीच सोशल मीडिया पर भाजपा-कांग्रेस के फोटो से सनसनी फैलाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। रविवार को इसी तरह की एक भाजपा विधायक राकेश गिरि की तस्वीर परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हुई। नवदुनिया ने जब भाजपा विधायक गिरि से बात की तो वे बोले कि वे भाजपा में थे और भाजपा में ही रहेंगे।


भाजपा नेता के फॉर्म हाउस पर हैं डंग व कंषाना?


बिसाहूलाल के साथ लापता हुए हरदीप सिंह डंग और रघुराज सिंह कंषाना अभी भी नहीं लौटे हैं। इनके बारे में भी यह कहा जा रहा है कि उन्हें भी भाजपा के एक नेता के फॉर्म हाउस पर रखा गया है। इसके पहले भी निर्दलीय और सपा-बसपा विधायक कांग्रेसी खेमे में लौट आए हैं।


तस्वीर में चेहरे पर दिखा खौफ


बेंगलुरु विमानतल से मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने बिसाहूलाल के साथ की तस्वीर वायरल की। इस तस्वीर में बिसाहूलाल के चेहरे का खौफ साफ तौर पर देखा जा सकता है। कांग्रेसी नेताओं का दावा है कि बंधक बनाए जाने की नाराजगी और मुक्त होने की खुशी बिसाहू के चेहरे पर देखी जा सकती है।


विधायकों को साधने की कसरत


भाजपा और कांग्रेस में विधायकों को साधने की कसरत खूब चल रही है। दिल्ली के पास हरियाणा के मानेसर की एक होटल में यहां के विधायकों को जबरिया रोके जाने से सियासी घमासान की शुरुआत हुई थी। इसके बाद पांच विधायक एदल सिंह कंषाना, संजीव सिंह कुशवाह, रामबाई, राजेश शुक्ला तो अगले दिन भोपाल लौट आए थे, लेकिन बिसाहूलाल, हरदीप सिंह डंग, रघुराज सिंह कंषाना व सुरेंद्र सिंह शेरा लापता हो गए थे। बाद में उन्हें बेंगलुरु ले जाए जाने का पता चला तो मध्यप्रदेश सरकार ने अपने मंत्रियों को सक्रिय किया। नतीजतन पहले सुरेंद्र सिंह शेरा और इसके बाद बिसाहूलाल की वापसी तो हो गई, लेकिन बाकी दो विधायकों पर अभी घमासान चल रहा है।