शिवराज ने चौथी बार ली मुख्‍यमंत्री पद की शपथ, तुरंत पहुंचे बैठक लेने, मोदी ने दी बधाई

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद शिवराज सिंह चौहान Shivraj Singh Chauhan ने चौथी बार मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। वे मध्‍य प्रदेश के 32 वें मुख्‍यमंत्री बने हैं। उमा भारती और पूर्व सीएम कमल नाथ भी कार्यक्रम में पहुंचे थे। ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने ट्वीट कर शिवराज को बधाई दी। वहीं शपथ के तुरंत बाद शिवराज अधिकारियों की बैठक लेने पहुंच गए। इसमें कोरोना से बचाव के लिए प्रबंधों की समीक्षा की जाएगी। कमल नाथ ने इस मौके पर मीडिया से कहा कि हम सब मिलकर मध्‍य प्रदेश का विकास करेंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शिवराज को बधाई दी। मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनने और चौथी बार मुख्यमंत्री का पद संभालने पर श्री शिवराजसिंह चौहान जी को हार्दिक बधाई।प्रदेश के विकास प्रगति और उन्नति में मैं सदैव आपके साथ खड़ा हूं।मुझे पूरा विश्वास है कि आप के नेतृत्व में मप्र विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।


 


राजभवन में हुए शपथ समारोह में मीडिया को प्रवेश नहीं दिया गया। शिवराज और अन्‍य नेता यहां विधायकों के साथ पहुंचे। कोरोना के प्रकोप को देखते हुए सीमित लोगों को ही कार्यक्रम में शामिल किया गया। शपथ के बाद शिवराज ने कोरोना का जिक्र करते हुए कहा कि मैं सबको नमस्‍कार कहते हुए आभार प्रकट कर रहा हूं। इससे पहले उम्‍मीदों के अनुसार शिवराज सिंह चौहान शिवराज सिंह चौहान ही भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता चुने गए । बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक विनय सहस्‍त्रबुद्धे और अरुण सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्‍यम से जुड़े। पर्यवेक्षकों ने इस निर्णय पर मुहर लगाई। पहली बार वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में सर्वसम्‍मति से यह चुनाव किया गया। कोरोना संकट के मद्देनजर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान को ही भाजपा विधायक दल का नेता बनाए जाने को हरी झंडी दिखा दी । इसके बाद औपचारिकता पूरी की गई। गोपाल भार्गव ने शिवराज के नाम का प्रस्‍ताव रखा। इसके बाद अन्‍य नेताओं ने इसका अनुमोदन किया। सभी ने शिवराज के नाम पर सहमति जताई। शिवराज ने अपने चयन के बाद संबोधन में कहा कि य‍ह उनके लिए बहुत भावुक पल है। वे हमेशा पार्टी के एक साधारण कार्यकर्ता रहे । यह भाजपा में ही संभव है कि एक सामान्‍य कार्यकर्ता को ऐसा काम करने का अवसर मिले। शिवराज ने पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के साथ पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं का आभार जताते हुए कहा कि उन्‍हें चुनौतीपूर्ण समय में यह दायित्‍व मिला है। शिवराज ने कमल नाथ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस सरकार ने अल्‍प समय में ही प्रदेश को तबाह कर दिया है। अब सब मिलकर प्रदेश के विकास के‍ लिए काम करेंगे। एक परिवार के सदस्‍य के तौर पर आत्‍मीयता से काम करेंगे और सबको साथ लेकर चलेंगे। हम प्रदेश को फिर विकास की दिशा में अग्रसर करेंगे और जनकल्‍याण की दिशा में इतिहास रचेंगे। उन्‍होंने कोरोना का जिक्र करते हुए कहा कि यह समय जश्‍न का नहीं हालात हमें इसकी इजाजत नहीं देते। इस विपदा से हम सब को मिलकर निपटना है। शपथ ग्रहण समारोह रात नौ बजे प्रस्‍तावित है। इससे पहले गोपाल भार्गव ने नेता प्रतिपक्ष पद से इस्‍तीफा दे दिया था। विधायक दल की बैठक में मप्र भाजपा अध्‍यक्ष वीडी शर्मा, गोपाल भार्गव, नरोत्‍तम मिश्रा और विधायक गण मौजूद थे। काेरोना के चलते शिवराज सहित प्रमुख नेता और‍ विधायक मास्‍क लगाकर पहुंचे। गोपाल भार्गव ने विधायक दल की बैठक में स्‍वागत संबोधन दिया। उन्‍होंने अपने कार्यकाल से जुड़ी स्‍मृतियों को ताजा किया। उन्‍होंने ठहाकों के बीच कहा कि ईश्‍वर से यही प्रार्थना है कि अब भाजपा का कोई नेता प्रतिपक्ष न हो, हम हमेशा लोगों की सेवा के लिए सरकार में रहें। राजभवन में शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने की सभी तैयारी कर ली गई है। फिलहाल उन्हें अकेले ही शपथ दिलाई जाएगी। अधिकतम 40 लोगों के बैठने का इंतजाम किया गया है। प्रत्येक आमंत्रित अतिथि को इस तरह बैठाया जाएगा कि उनके बीच कम से कम एक मीटर की दूरी रहे। यदि किसी कारण वश इससे अधिक लोग आते हैं तो राजभवन के सभागार में शपथ समारोह शिफ्ट कर दिया जाएगा। लान और सभागार दोनों स्थान पर व्यवस्था कर ली गई है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से छाए सियासी कोहरे के अब छंट गए हैं। शिवराज सिंह चौहान चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालेंगे। पार्टी की तैयारी सोमवार को ही विधायक दल की बैठक बुलाने की थी, लेकिन कोरोना वायरस अलर्ट के चलते व्यवस्था संभालने के लिए यह फैसला लिया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को दो बार शिवराज सिंह चौहान से कोरोना के मुद्दे पर बातचीत की थी। इसमें उन्होंने चौहान को प्रशासन से संपर्क बनाए रखने के लिए भी कहा है। दूसरी वजह सिंधिया के समर्थन के कारण बन रही सरकार को चलाने में समन्वय का मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा, इसलिए चौहान के अनुभव का पार्टी को लाभ मिलेगा। मालूम हो कि सरकार के अल्पमत में आने के बाद 18 मार्च को कमल नाथ ने इस्तीफा दे दिया था।