भोपाल। शिवराज सिंह चौहान उस दौर में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं, जब चुनौतियों का पहाड़ उनके सामने खड़ा हुआ है। खजाना खाली है। प्रशासनिक व्यवस्था चरमराई हुई है। किसानों की कर्जमाफी का दूसरा दौर चल रहा है और तीसरा चरण बाकी है। औद्योगिक विकास को लेकर जो पहल हुई है, उसे मंजिल तक पहुंचाना है तो 24 विधानसभा सीटाें के उपचुनाव के साथ नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कुछ माह में होना प्रस्तावित है। हालांकि, उनके साथ सकारात्मक पक्ष यह है कि उन्हें प्रशासन का लंबा अनुभव है और केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल भी स्थापित हो जाएगा। कमल नाथ सरकार जब सत्ता में आई थी, तब यह आरोप शिवराज सरकार के ऊपर लगाए जाते थे कि वो खजाना खाली छोड़कर गए हैं। कमोबेश यही स्थिति आज भी बरकरार है। प्रदेश के ऊपर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज हो चुका है। स्थिति यह है कि केंद्रीय कर्मचारियों को अक्टूबर में पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा करने के बाद प्रदेश में इसे मार्च में लागू किया गया। इसका भुगतान अप्रैल में दिए जाने वाले मार्च के वेतन में होगा। इसके लिए डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का इंतजार करना होगा। कर्मचारी जुलाई 2019 से मार्च 2020 तक पांच प्रतिशत महंगाई भत्ते का एरियर (12 से बढ़ाकर 17 प्रतिशत किया गया है महंगाई भत्ता) देने का दबाव बनाएंगे। पौने पांच लाख पेंशनर्स को महंगाई राहत देने के बारे में भी नई सरकार को निणर््ाय लेना होगा। शिवराज सरकार ने मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना 'संबल" के माध्यम से सौ रुपए में सौ यूनिट बिजली देने की योजना लागू की थी। कमल नाथ सरकार ने इसका दायरा डेढ़ सौ यूनिट प्रतिमाह उपयोग करने वालों तक बढ़ाया। इसकी वजह से सरकार के ऊपर सब्सिडी का भार 13 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 17 हजार करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया है।
कांग्रेस की सत्ता में वापसी की राह आसान बनाने वाली किसान कर्जमाफी योजना का दूसरा चरण चल रहा है। राजनीतिक दृष्टिकोण से इस योजना में छेड़छाड़ आसान नहीं होगी। सरकार को इसके लिए पांच हजार करोड़ रुपये का इंतजाम फौरी तौर पर करना होगा। इसके बाद तीसरा और अंतिम दौर शुरू होगा।
इसमें करीब पांच लाख किसानों को कर्जमाफी दिए जाने की संभावना है। इसमें चालू खाते में दो लाख रुपये तक कर्जमाफी होनी है। इसके लिए करीब आठ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का इंतजाम करना होगा। इसी तरह औद्योगिक विकास को लेकर कई प्रोजेक्ट प्रक्रिया में हैं। इन्हें तेजी से अमल में लाने के साथ निवेश को आकर्षित करने के कदम उठाने होंगे, क्योंकि विकास की गति को बढ़ाने के लिए आर्थिक गतिविधियां बढ़ानी होंगी।
कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति और पदोन्नति
प्रदेश में अगले माह से बड़े स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति का सिलसिला शुरू हो जाएगा। वित्त विभाग के अनुसार दिसंबर 2020 तक 13 हजार से ज्यादा कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। इनकी देनदारी चुकाने के लिए साढ़े चार-पांच हजार करोड़ रुपये का इंतजाम करना होगा। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि अमले की कमी की वजह से प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित न हों। स्थापना व्यय बढ़ता जा रहा है। इसे देखते हुए रण्ानीति बनानी होगी। यदि सेवानिवृत्ति की आयु में फिर से वृद्धि की जाती है युवाओं के रोजगार के अतिरिक्त विकल्प तलाशने होंगे। इसके साथ ही पदोन्न्ति में आरक्षण पूर्व की तरह बड़ा मुद्दा बना हुआ है। 2018 के विधानसभा चुनाव में इसने बड़ी भूमिका निभाई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और जल्द सुनवाई होने की संभावना है। इसको लेकर सरकार को स्पष्ट रणनीति बनानी होगी, ताकि कर्मचारियों में जो नाराजगी है, उसे दूर किया जा सके।