सरकार के संकट में फंसने का ठीकरा महाराज के सिर पर फोड़ने की तैयारी

ग्वालियर। व्यक्ति हो या सरकार सबको गति अपने कर्मों से मिलती है। लेकिन कोई न कोई माध्यम अवश्य बनता है। कमलनाथ सरकार, विधायकों की नाराजगी या फिर लालच से संकट में फंस गई है। संकट से उभारने के लिए सरकार के संकटमोचक सक्रिय हैं। पहला ऐसा सियासी संकट है, जिसका ठीकरा फोड़ने के लिए सिर तलाशने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि बड़े सरकार व महाराज के बीच सड़क पर उतरने के लिए तनातनी के बीच यह तय है कि उनके विरोधी हाईकमान के समाने महाराज को ही इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे। क्योंकि महाराज के तीन चहेते विधायक दिल्ली तक पहुंच गए थे और फिर महाराज भी संकट टलने तक खामोश रहे। राजा पहले ही महाराज के परिवार का इतिहास बता चुके हैं।


नेता पुत्रों के बीच द्वंद से कमलदल फायदे में


पार्षदी से दिल्ली पहुंचे ठाकुर साहब और बगैर कोई चुनाव जीते दिल्ली में प्रबुद्ध जमाने वाले बिहारी बाबू के बेटों के बीच द्वंद कमलदल में जगजाहिर है। दोनों ही नेता अपने पुत्रों को सियासत में लॉन्च करने का रास्ता काफी दिनों से तलाश रहे हैं। लेकिन कमलदल के परिवारवाद का सिद्धांत आड़े आ रहा है। लेकिन इन नेताओं ने हिम्मत नहीं हारी है। अपने पुत्रों को राजनीति में स्थापित कराने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। वे कोई गुनाह भी नहीं कर रहे हैं। हर पिता की चाहत होती है कि उनका बेटा उनसे दो कदम आगे निकले। आजीवन सहयोग निधि को लेकर ठाकुर साहब व बिहारी बाबू के बेटों में आगे निकलने की होड़ लगी है। सबसे पहले ठाकुर साहब के बेटे ने आजीवन सहयोग निधि के 3 लाख 41 हजार के रसीद कट्टे लिए। पीछे से बिहारी बाबू के चिरंजीव 3 लाख 51 हजार के रसीद कट्टे ले आए।


 

सरकार पंजे दल की, खुश हैं कमलछाप व्यापारी


जीवाजी क्लब के चुनाव के दौरान बजरंगी दादा समर्थक व थाटीपुर वाले ठाकुर साहब के समर्थकों के बीच हंसी-मजाक में तकरार हो रही थी। इस तकरार में हमारे भी कान लगे हुए थे। तकरार का विषय कमलनाथ सरकार के मंत्री थे। होटल व्यवसाए के साथ अन्य कारोबारों से जुड़े कमलछाप व्यापारी का साफ कहना था कि व्यापार करना अपनी सरकार की अपेक्षा अभी आसान है। बस जेब भारी होनी चाहिए। काम चुटकियों में हो जाता है। इसलिए हमने तो भैय्या कारोबार चलाने के लिए खदानों के विवाद में भारी पड़ी मंत्री का दामन पकड़ लिया। यह बात ठाकुर साहब को भी बता दी है। बस अटैची दिखाते हैं और अपने काम हो जाते हैं। अपनी सरकार में मंत्री अधिकारियों के इशारे पर चलते थे, इनकी सरकार में मंत्रियों के इशारे पर अधिकारी चलते हैं।


 

अब परीक्षा नरों में श्रेष्ट नेताजी की


भोपाल के बड़े सरकार को मुश्किलों में डालने में कमलदल के नरों में श्रेष्ट की प्रमुख भूमिका रही है। कल्फदार कुर्ते-पजामा पहनकर और मुंह में बीड़ा दबाकर सवां साल से सरकार के हाथ धोकर पीछे पड़े हैं। बड़े सरकार एक आईएएस अफसर के माध्यम से इन्हें समझा भी चुके हैं। लेकिन वे मानने के लिए तैयार नहीं हैं। इसका खमियाजा नेताजी के खास व्यस्थापक उठा भी चुके हैं। नेताजी की इस बार की गुस्ताखी से बड़े सरकार की भौंहें तनी हुई हैं। इसलिए इस बार नरों में श्रेष्ठ को अग्निपरीक्षा तो देनी ही पड़ेगी। क्योंकि उनकी फाइलें और रंगीनमिजाजी के किस्से पहले से सरकार के पास हैं। सरकार की वक्रदृष्टि से नेताजी भले ही बेफिक्र नजर आ रहे हैं। लेकिन उनके नजदीकी व्यवस्थापकों की रातों की नींद अवश्य उड़ी हुई हैं। क्योंकि इसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। अब देखना है कि कमलदल के संकट मोचक कैसे इस अग्निपरीक्षा में पास होते हैं।