दतिया। कोरोना के लिए विभाग द्वारा की जा रही जागरुकता का असर दतिया में देखने को मिल रहा है। इसके चलते शहर की सड़कें वीरान हो गई है। वहीं सार्वजनिक स्थल भी सूनसान नजर आ रहे है। वहीं धार्मिक स्थलों पर लोगों की आवाजाही कम देखने को मिल रही है। इस जागरुकता का असर क्षेत्रीय व्यापार पर भी देखने को मिल रहा है। लोगों की आवाजाही कम होने से स्थानीय व्यापार थम सा गया है। इसके चलते छोटे व्यापारियों को अधिक परेशानी नजर आ रहे है। हालांकि ऐतिहात के तौर पर प्रशासन और प्रबंधन द्वारा खासे इंतजाम किए है।
कहां क्या हालात
सूनसान रहे दार्शिनिक स्थान
वर्तमान में पीतांबरा मंदिर को 18 मार्च से 5 अप्रैल तक के लिए श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया है। फिर भी लोगों की आवाजाही कम देखने को मिल रही है। प्रचार-प्रसार के चलते दूर दराज से लोग तो आए हैं। जिन्हें निराश ही लौटना पड़ रहा है। पीतांबरा पीठ पर होर्डिंग व एनांउसमेंट के जरिए लोगों कोरोना के प्रति जागरुक भी किया जा रहा है। इसका असर आसपास के दुकानदारों पर खासा पड़ा है। कई अस्थाई दुकानदारों ने दुकानें ही नहीं लगाई हैं। वहीं मंदिर बंद होने की वजह से ट्रेन व बस से आए लोगों को सीढियों पर बैठकर अपनी अगली ट्रेन के लिए इंतजार करना पड़ा। वहीं किला, राजसी छतरियां व अन्य धार्मिक स्थलों पर भी बेहद कम संख्या में लोग नजर आए।
नगर पालिका कार्यालय ऐसा स्थान हैं। लोगों की खासी आवक रहती है। लेकिन वर्तमान में यहां लोगों का आनाजाना बेहद कम हो गया है। वहीं कार्यालय में बैठे लोगों भी सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं दिख रहे है। वहीं नगर पालिका द्वारा सुरक्षा सामान उपलब्ध कराया गया है। नगर पालिका सीएमओ अमजद गनी का कहना है कि सफाईकर्मियों को सुरक्षा किट उपलब्ध कराई गई। लेकिन कार्यालय में अधिकांश कर्मचारी बिना मास्क के ही नजर आए। जिनका कहना था कि अभी तक उन्हें किट नहीं मिली है। इसके अलावा महिला बाल विकास के कार्यालय पर भी लोगों का आवागमन अधिक होता है। ऐतियात के तौर पर सैनिटाइजर मंगवाए जा रहे है। वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों को भी हितग्राहियों के लिए बंद कर दिया गया है।
शहर की सड़कों पर भी लोगों का आवागमन बेहद कम नजर आ रहा है। वहीं दार्शिनिक स्थलों पर कम आवक को देखकर टैक्सी चालक भी कम ही गाड़ियां निकाल रहे हैं। टैक्सी चालकों का कहना है कि एक दम से धंधा गिर गया है। सवारियां नहीं मिल रही है। वहीं बस स्टैंडों पर भी खाली बसों की संख्या बढ़ गई है।
खाली पड़े पार्क
शहर में लगभग 2 या तीन ही पार्क ऐसे हैं। जहां लोगों की आवाजाही होती है। लेकिन वर्तमान में अधिकांश लोग घरों में ही रहने के चलते पार्कों में भी भीड़भाड नजर नहीं आ रही है। अधिकांश पार्क खाली ही दिखाई दे रहे हैं।