पुरातत्व की एनओसी खत्म, शहर से छिनी रोप-वे की सौगात

ग्वालियर। एक दशक से अटका शहर का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रोप-वे आखिर राजनीति का शिकार हो गया। समय पर काम शुरू नहीं हो सका और अब पुरातत्व विभाग की एनओसी की अवधि भी खत्म हो गई। निगम प्रशासन इसके निर्माण में तकनीकी खामी बता रहा है जबकि मामला राजनीति में उलझा है। निर्माण एजेन्सी ने भी फूलबाग पर अपर टर्मिनल का काम बंद कर रखा है।


निश्चित समय पर काम करना था खत्म


रोप-वे निर्माण के लिए नगर निगम ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया(एएसआई), राज्य पुरातत्व विभाग, वन विभाग, रेलवे सहित अन्य विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लिया था। एएसआई ने निश्चित समय में काम पूरा करने के लिए एनओसी दी थी। लेकिन काम पूरा नहीं हो सका और अब उसकी अवधि खत्म हो गई है। इसलिए शहर की यह बड़ी सौगात फिलहाल छिन गई है। अब नए सिरे ने एनओसी की प्रक्रिया करना होगी। लेकिन राजनीतिक का अखाड़ा बनने से निर्माण एजेन्सी अब हाथ खड़े कर रही है।


 

निगमायुक्त का बहाना, क्षतिग्रस्त हो रही किले की दीवार


निगमायुक्त संदीप माकिन ने काम बंद होने का कारण अपर टर्मिनल के स्थान पर किले की दीवार क्षतिग्रस्त होना बताया। उनका कहना है कि मशीन से काम शुरू होने पर किले की दीवार क्षतिग्रस्त हो रही थी। किला राष्ट्रीय धरोहर है। उसको क्षति नहीं होना चाहिए। इस पर आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया ने भी आपत्ति की है। हालांकि वे अब तक सांसद को आपत्ति का पत्र उपलब्ध नहीं करा सके है।


 

सांसद ने दी थी हिदायत


सांसद विवेक शेजवलकर ने पिछले साल 18 अक्टूबर को बाल भवन में रोप-वे सहित अन्य प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक ली थी। उन्होंने निर्माण एजेन्सी के ठेकेदार नरेश अग्रवाल से काम बंद होने का कारण पूछा था। श्री अग्रवाल ने बताया था कि लोअर टर्मिनल का ज्यादातर काम हो चुका है। किले पर सिंधिया स्कूल के पास अपर टर्मिनल का काम शुरू हो गया था। लेकिन बाद में निगमायुक्त ने तकनीकी खामी बताते हुए काम बंद करा दिया था। निगम और निर्माण एजेन्सी के विरोधाभाषी बयान से सांसद भी हैरान थे।


रोप-वे के सपने का सफर


दामोदर रोप-वे कन्स्ट्रक्शन कंपनी कोलकाता ने 29 मार्च 2004 को रोप-वे के लिए प्रस्ताव भेजा। तत्कालीन निगम कमिश्नर विवेक सिंह ने प्रस्ताव तैयार कराया।


बीओटी(बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर) के आधार पर ऑफर मंगाने के लिए 9 जून 2005 में विज्ञापन जारी किए गए।


25 मई 2006 में एमआईसी में रोप-वे निर्माण का संकल्प पारित हुआ।


7 जुलाई 2006 को निगम परिषद में रोप-वे संचालन के लिए प्रस्ताव पारित किया गया।


 

लोअर टर्मिनल फूलबाग बोट क्लब के पास बनाने की जगह तय की गई,जबकि अपर टर्मिनल के लिए किले पर सिंधिया स्कूल के नजदीक स्थान का चयन हुआ। वहां कलेक्टर के आदेश पर निगम को 4 हजार वर्ग फीट जमीन आवंटित की गई।


7 जून 2008 को दामोदर रोप-वे कंपनी के साथ निगम ने अनुबंध किया। निर्माण के लिए निगम ने कंपनी को 2012 में वर्क ऑर्डर जारी किए। रोप-वे कंपनी ने यह काम बालाजी डवलपर्स प्रालि को सौंप दिया है।


एनओसी में ही बीत गए 10 साल


निगम ने 7 अगस्त 2006 को पुरातत्व विभाग से एनओसी के लिए पत्र लिखा। पुरातत्व विभाग ने 4 साल बाद 1 अक्टूबर 2010 को 1 साल के लिए अनुमति दी। समय सीमा में काम न होने पर निगम के आग्रह पर यह अवधि बढ़ा दी।


इसके बाद पुलिस, फायर बिग्रेड, बिजली कंपनी तथा चिड़ियाघर की एनओसी भी इसी दौरान मिल गई।


स्टेट इन्वायरमेंट इम्पैक्ट ऐसेसमेंट अथॉरिटी(सिया) ने पहले अनुमति दे दी थी,लेकिन काम शुरू न होने पर उसे निरस्त कर दिया। अब इसे मई 2019 तक के लिए फिर बढ़ा दिया है।


पिछले साल एयरफोर्स, वन विभाग तथा रेलवे ने भी एनओसी दे दी। सभी विभागों से एनओसी मिलने पर निगम ने निर्माण कार्य शुरू करने के लिए एजेन्सी को पिछले साल अक्टूबर में पत्र जारी कर निर्माण जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।


6 ट्रॉलियों का प्लान


फूलबाग से किले तक रोप-वे की लंबाई 600 मीटर रहेगी। इसमें कुल 6 ट्रॉलियां रहेंगी। संचालन में यह शर्त रखी गई कि टिकट की 25 फीसदी राशि निगम को मिलेगी। कंपनी को 30 साल के लिए संचालन दिया जाएगा।


इनका कहना है


रोप-वे निर्माण में तकनीकी खामी है। इसके समाधान के प्रयास कर रहे हैं। समाधान होते ही काम शुरू कर देंगे।


नरेश अग्रवाल, संचालक बालाजी डेवलर्प प्रालि


दीवार में आया क्रेक


अपर टर्मिनल वाले स्थान पर किले की दीवार में क्रेक आ गया है। इसलिए काम बंद करना पड़ा है।


संदीप माकिन,निगमायुक्त


नगर निगम ने रोका


रोप-वे का काम नगर निगम ने रोके रखा है। मैंने इसके निर्माण की चेतावनी दी थी। जल्द ही इसकी समीक्षा की जाएगी।


विवेक शेजवलकर, सांसद