भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना से जूझने के साथ ही नई सरकार में भी जगह बनाने की जंग आरंभ हो गई है। शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके भाजपा के कई विधायक जोड़-तोड़ में सक्रिय हो गए हैं। वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक भी अपने-अपने लिए गोटियां बिछा रहे हैं। संकेत साफ हैं कि नई सरकार में सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ ही बागियों को दिए गए वचन की भी झलक दिखेगी।
नरोत्तम को मिलेगा तोहफा
कांग्रेस की कमल नाथ सरकार गिराने में शिवराज सिंह चौहान के अलावा पूर्व मंत्री नरोत्त्तम मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पार्टी नरोत्त्तम को इसका तोहफा जरूर देगी, वहीं नेता प्रतिपक्ष रहे गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, वरिष्ठ विधायक अरविंद सिंह भदौरिया, राजेंद्र शुक्ला, विश्वास सारंग, संजय पाठक, कमल पटेल, विजय शाह, हरिशंकर खटीक, गौरीशंकर बिसेन, अजय विश्नोई जैसे भाजपा के कई विधायक हैं, जिनके मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के पूरे आसार हैं। नई सरकार में प्रदेश के सभी संभागों से मंत्री बनाने के साथ क्षत्रिय, ब्राह्मण, पिछड़े, अनुसूचित जाति और आदिवासी समाज को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय कहते हैं कि नई सरकार में संतुलित मंत्रिमंडल होगा, जिसमें क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन के साथ ही अनुभवी और युवा चेहरों को भी मौका मिलेगा। साथ ही कांग्रेस छोड़कर जो नए नेता जुड़े हैं, उनके साथ भी प्रतिबद्धता निभाई जाएगी।
बागियों को शपथ दिलाने में सिंधिया की होगी अहम भूमिका
22 से 25 सदस्यीय मंत्रिमंडल के संकेत
उधर सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों ने भी अपने-अपने समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। कमल नाथ सरकार में मंत्री रहे प्रदीप जायसवाल तो पहले ही भाजपा सरकार में शामिल होने की बात कहकर माहौल गर्मा चुके हैं। बसपा और सपा के सदस्य भी दावेदारी में पीछे नहीं हैं। अन्य निर्दलीय विधायक भी जुगाड़ लगाने में जुट गए हैं। मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत 35 मंत्रियों का कोटा है, लेकिन संकेत यह भी है कि 22 से 25 सदस्यीय मंत्रिमंडल रहेगा।