मां मासूमों को स्टेशन पर छोड़ गई, भगाया तो बस स्टैंड पहुंचे, अब आवास गृह पहुंचाया

ग्वालियर। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर एक मां अपने दो छोटे बच्चों को छोड़कर चली गई। मासूमों से बोली कि वह झांसी में मजदूरी के लिए जा रही हैं, जल्दी आकर ले जाएगी। दो दिन तक मां नहीं लौटी, इसी बीच स्टेशन से बच्चों को भगा दिया गया। मासूम भीड़ के साथ बस स्टैंड पर पहुंच गए। रविवार की सुबह जब मजदूरों के साथ इनको भी बस में बैठाया जाने लगा तो वह रोने लगे। बच्चों ने जब पूरी कहानी बताई तो उनको पुलिस चौकी में बैठा दिया गया। सिपाही ने अपने घर से खाना मंगाकर बच्चों को खिलाया, इसके बाद उनको चाइल्ड लाइन के जरिए बाल आवास गृह पहुंचा दिया गया। सागर निवासी गीता अपने देवर राहुल और दो बच्चों के साथ तीन दिन पहले ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर आई थी। एक बच्चे की उम्र 10 साल, जबकि दूसरे की 7 साल है। गीता ने दोनों बच्चों से कहा कि वह चाचा के साथ झांसी में मजदूरी के लिए जा रही है। एक-दो दिन में आकर दोनों को ले जाएगी। मां बच्चों को कुछ खाने का सामान देकर चली गई थी। खाना खत्म हो गया, दिन भी गुजर गया मगर मां या चाचा कोई नहीं आया। स्टेशन पर लोगों से मांगकर बच्चे जैसे तैसे गुजर बसर कर रहे थे, उनको उम्मीद थी कि उनकी मां जल्दी आ जाएगी। कोरोना वायरस की दशहत के चलते जब बीते रोज रेलवे ने फालतू घूमने वालों को स्टेशन से खदेड़ना शुरू किया तो यह बच्चे भी भीड़ के साथ रोडवेज बस स्टैंड पहुंच गए। रविवार की सुबह जब आरटीओ महाराष्ट्र से आए मजदूरों को बसों के जरिए उनके घर पहुंचाने लगे तो यह बच्चे रोने लगे। जब पूछताछ हुई तो बच्चों ने पूरी कहानी सुनाई। सिपाही ने मंगाया घर से खानाः-पुलिसकर्मी श्रवण कुमार ने जब बच्चों से पूछा कि कुछ खाया है तो उन्होंने बताया कि रात से एक दाना नहीं खाया। सभी दुकाने एवं होटल बंद थे, इसलिए पुलिसकर्मी ने घर से खाना मंगाकर बच्चों को खिलाया। पुलिसकर्मी ने बच्चों के बताए नंबर पर फोन लगाकर रिश्तेदार से भी बात की, मगर उनका कहना था कि आने में एक दो दिन लगेंगे। इसके बाद चाइल्ड लाइन को सूचना दी गई, जिनके जरिए बच्चों को बाल आवास गृह पहुंचा दिया गया है।