भोपाल । लगातार 13 साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने वाले शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर इतिहास रचने जा रहे हैं। वे प्रदेश के पहले नेता होंगे, जो चौथी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। 1972 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के तौर पर सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। नेतृत्व के गुण छात्र जीवन से ही शिवराज में थे। वर्ष 1975 में मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए। आपातकाल के खिलाफ भूमिगत आंदोलन में हिस्सा लिया और 1976-77 के बीच भोपाल सेंट्रल जेल में बंद रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषांगिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भोपाल के 1977-78 में संगठन सचिव रहे। 1978 से 1980 तक संगठन के प्रदेश के संयुक्त सचिव और फिर 1980 से 82 तक महासचिव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। वर्ष 1984-85 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के संयुक्त सचिव, 1985-88 में महासचिव और फिर 1988-91 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। 1990 में नौंवी विधानसभा के सदस्य चुने गए। 23 नवंबर 1991 को उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से त्याग पत्र देकर 1991 में दसवीं लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुए। 1991-92 में अखिल भारतीय केशरिया वाहिनी का संयोजक बनाया गया। 1992 से अखिल भारतीय जनता युवा मोर्चा के महासचिव बनाए गए। वर्ष 1992-94 में प्रदेश भाजपा के महासचिव रहे।
1992-96 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति, 1993-96 में श्रम और कल्याण संबंधी समिति, 1994-96 में हिंदी सलाहकार समिति एवं 1995-96 में सभा की बैठकों से सदस्यों की अनुपस्थिति संबंधी समिति के सदस्य रहे। 1996 में ग्यारहवीं लोकसभा के लिए फिर चुने गए। वर्ष 1996-97 में शहरी और ग्रामीण विकास संबंधी समिति एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति, 1997-98 में शहरी और ग्रामीण विकास संबंधी समिति के सदस्य और प्रदेश भाजपा के महासचिव रहे।
2005 में बने पहली बार मुख्यमंत्री
मई 2005 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने। 29 नवंबर 2005 को पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 6 मई 2006 को उपचुनाव में बारहवीं विधानसभा के लिए बुदनी विधानसभा से चुने गए। इसके बाद उन्होंने 10 मई 2006 को लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। 12 मई 2006 को विधानसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली। 12 दिसंबर 2008 को दूसरी बार और 14 दिसंबर 2013 को तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। 12 दिसबर 2018 तक मुख्यमंत्री रहे और विधानसभा चुनाव में पांचवीं बार विधायक चुने गए, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा नहीं होने की वजह से भाजपा सत्ता से बाहर हो गई। पार्टी ने उन्होंने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी।