भोपाल । पंद्रह महीने विपक्ष में रहने के बाद फिर शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार मध्यप्रदेश की कमान संभाल ली है। चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बनने वाले मप्र के पहले राजनेता हैं। इससे पहले शिवराज ने 13 साल तक मप्र के सीएम की कुर्सी संभाली है। सोमवार रात 9 बजे राज्यपाल लालजी टंडन ने राजभवन में आयोजित बेहद सादे समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ लेने वाले चौहान अकेले नेता हैं। कैबिनेट के बाकी मंत्रियों को कुछ दिनों बाद शपथ दिलाई जाएगी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक हाईकमान (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह) पहले 25 मार्च यानी नवरात्र की शुरुवात के अवसर पर शपथ दिलवाना चाहता था लेकिन कोरोना के बढ़ते संकट को देखते हुए दो पहले ही शपथ दिलाने का फैसला ले लिया गया ।
पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चुना विधायक दल का नेता
इससे पहले भाजपा विधायक दल की बैठक में शिवराज को सर्वसम्मति से नेता चुना गया था। विधायक दल की बैठक का संचालन दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केंद्रीय पर्यवेक्षक और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह व मप्र प्रभारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने किया। कोराना वायरस के व्यापक खतरे को देखते हुए यह देश में पहला अवसर है, जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विधायक दल का नेता चुना गया। सबसे पहले गोपाल भार्गव ने नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दिया। भार्गव ने ही शिवराज को विधायक दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, गोपीलाल जाटव, मीना सिंह और पारस जैन ने उनके नाम का समर्थन किया। इस दौरान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने शिवराज का स्वागत किया।
कार्यवाहक मुख्यमंत्री थे कमलनाथ
कांग्रेस के 22 विधायकों के बगावत करने और सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी।इसके बाद, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 20 मार्च को पद से इस्तीफा दे दिया था। तब से ही कमलनाथ सरकार को राज्यपाल ने कार्यवाहक के तौर पर काम करने के निर्देश दिए थे।