कोरोना का कहर व भूखे पेट का दर्द, दिहाड़ी कामगारों पर दोहरी मार

ग्वालियर । कोरोना वायरस से हिंदुस्तान में अभी लंबी लड़ाई लड़ी जाने की दरकार है। लेकिन देश का एक बड़ा वर्ग 2 दिन में ही हतोत्साहित व खासा मजबूर दिखाई देने लगा है। रविवार व सोमवार को महज दो दिन बंद रहे बाजार ने दिहाड़ी कामगारों की हालत पतली कर दी है। रोजाना कमाने व खाने वाले हम्माल (पल्लेदार), मजदूर व ठेला लगाकर जीवन यापन करने वाले लोगों की दोहरी समस्या शुरू हो गई है। एक तो इन लोगों के बीच कोरोना का भय फैला हुआ है, दूसरा तमाम आवश्यक सामग्री के साथ ही भूखे पेट के दर्द से बचने की चुनौती दिहाड़ी कामगारों के सामने खड़ी हो गई है।गौरतलब है कि शनिवार शाम को ही शहर के दाल बाजार, लोहिया बाजार, ट्रांसपोर्ट नगर, महाराज बाड़ा, मुरार सदर बाजार, हजीरा मार्केट समेत अन्य सभी बाजारों व दुकानों को बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही तमाम भवन निर्माण कार्य व ऑटो, टमटम, लोडिंग वाहनों का संचालन व फुटपाथ व ठेले लगना भी बंद हो गए हैं। ऐसे में इन सभी कामों से जुड़े लोगों की रोजाना होने वाली आमदनी बंद हो गई है। ज्यादातर ऐसे हैं जो एक साथ एक महीने का राशन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। कई कामगारों ने तो बाजार से 10 फीसदी मासिक ब्याज दर पर कर्जा उठाकर फुटपाथ पर बेचने के लिए माल खरीदा था। जिसे अब वे बेच नहीं पा रहे न घरेलू जरूरत का सामान खरीद पा रहे हैं। अब 24 के बजाय 31 मार्च तक ग्वालियर को लॉक डाउन करने के आदेश जारी हो चुके हैं। ऐसे में जनता प्रशासनिक मदद की उम्मीद कर रहे हैं।


 

हमने खूब थाली-घंटी बजाई, लेकिन मोदी जी से बात नहीं होती


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जनता कर्फ्यू की अपील की थी। घर की खिड़की-दरवाजे से डॉक्टर व मीडियाकर्मियों समेत आवश्यक सेवाएं दे रहे अन्य लोगों के सम्मान में शाम 5 बजे 5 मिनट घंटी, शंख व थाली बजाने की भी अपील की थी। लेकिन पीएम की अपील के कारण जितने लोगों ने थाली-घंटी बजाई उससे अधिक लोगों की देखा-देखी बजाई गई। नईदुनिया ने सोमवार को कुछ दिहाड़ी मजदूरों के परिवारों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि सब लोग बजा रहे थे, इसलिए हमनें भी खूब थाली बजाई। सब कह रहे थे कि थाली की आवाज सुनकर कोरोना के कीटाणू भाग जाएंगे। हमें नहीं पता कि मोदी जी ने क्या कहा था, हमारी उनसे बात नहीं होती।


 

परेशानी की कहानी, दिहाड़ियों की जुबानी


मैं मुरार स्थित सदर बाजार में फुटपाथ लगाती हूं और मेरे पति ढाबे पर काम करते हैं। दोनों का काम बंद हो गया है। हम रोज कमाने-खाने वाले लोग हैं। कोरोना के कारण मुसीबत का समय है, भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। हमने इतनी मुसीबत झेली है और सही। सुरक्षित रहेंगे तो आगे जिंदगी बेहतर कर लेंगे।


रमा बाघला, निवासी, चार शहर का नाका हजीरा


दूसरे का लोडिंग वाहन ठेके पर चलाते हैं। अब कोई काम नहीं मिलने के कारण हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। रोज खाने कमाने वाले लोग हैं, 4 बधो हैं परिवार के भूखे मरने की हालत हो जाएगी। यह बात सही है कि कोरोना बड़ी विपदा है, लेकिन सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए।


राधे आदिवासी, निवासी, बाराघाटा


ठेले, गुमठी व फुठपाथ पर दुकान लगाने वाले लोगों का जीवन कठिन हो जाएगा। क्योंकि ज्यादातर लोग महीने का नहीं रोजाना राशन लाते हैं। कोरोना वायरस से बचने केलिए हम खुद सभी से आह्वान कर रहे हैं। लेकिन दिहाड़ी पर काम करने वालों के लिए शासन-प्रशासन कोई रास्ता निकाले, तभी प्रभावी लॉकडाउन हो पाएगा।


चंदन राठौर, जिलाध्यक्ष, फुटपाथ श्रमिक संघ ग्वालियर


दाल बाजार में करीब 1000 दिहाड़ी मजदूर दो शिफ्टों में पल्लेदार आदि का काम करते हैं। इनमें से 400 ऐसे होंगे जो रोजाना कमाकर सप्ताह में 3 दीन दाल बाजर से थोड़ा-थोड़ा राशन ले जाते हैं। शासन के आदेशानुसार बाजार 31 मार्च तक नहीं खुलेगा, ऐसे में इन मजदूरों का जीना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को इस ओर भी ध्यान देना होगा।


मनीष बांदिल, सचिव, व्यापार समिति दाल बाजार लश्कर


लोहिया बाजार से करीब 400 दिहड़ी मजदूर जुड़े हुए हैं। सैंकड़ों लोडिंग वाहनों को भाड़ा मिलता है। अब लोडिंग चलाने वाले दिहाड़ी ड्राइवरों की आजीविका का साधन खत्म हो गया है। लॉकडाउन को प्रभावी बनाने के लिए इस ओर भी ध्यान देना जरूरी है।


निर्मल जैन, सचिव, लहिया बाजार


ट्रांसपोर्ट नगर में बाहर से आए सैंकड़ों ट्रक ड्रायवरों के खाने का कोई इंतजाम नहीं हैं। मिस्त्री, पल्लेदार समेत अन्य मजदूरों की दिहाड़ी बंद हो गई है। बिना काम को कोई शायद ही इन्हें पैसा देगा। सरकार को योजना बनानी होगी।


राजीव मोदी, अध्यक्ष, लोकल ट्रांसपोर्ट यूनियन