ग्वालियर । कोरोना वायरस ने भले ही सभी के लिए मुसीबतें पैदा कर दी हैं, लेकिन साहित्य का सृजन करने वालों को एक तरह से मौका देना है। क्योंकि अब न तो वे किसी से मिल रहे हैं और न घर से बाहर घूमने के लिए जा रहे हैं। बस सुबह से रात तक के समय को साहित्य को समर्पित कर रहे हैं। इन रचानाकारों का भी कहना है घर के अन्य सदस्य भी समय के बाद बात कर-कर के थक जाते हैं। इसके बाद वे अपनी कलम उठाते हैं। उनका कहना है, जिन रचनाओं को उन्होंने लिखा है, उनकी प्रस्तुति भी माहौल ठीक होने के बाद शहर या प्रदेश में मिलने वाले मंच से देंगे।
कवियों ने वायरस के प्रभाव में खोजा मौका, सृजन किया रचनाओं का
• ANWAR KHAN