हालातों को किया बड़े ही प्रभावी ढंग से व्यक्त लोहे से लोहा कटे, शूल निकाले शूल, अपने हित के वास्ते, मानवता मत भूल,
ऐसे नेता अब नहीं, मिले न जिनमें दाग, भ्रष्टाचारी मत कहो, यह है शिष्टाचार रिश्वत दे होते भरी, जो करते भ्रष्टाचार॥
डॉ. मधुलिका सिंह भदौरिया
शायरी से बयां होता है शायर का मिजाज रात में चांद-तारे उगते हुए, दिन में यादों की महफिल सजाते हुए, साथ अपने गुजारा करो आजकल जश्न तन्हाइयों का मनाते हुए।
मदन मोहन दानिश