चलो छोड़कर सब जमाने की बातें, करें चांद पर आशियाने की बातें

भोपाल । गौहर महल में चल रहे 'माटी की महक' प्रदर्शनी में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शहर की रचनाकारों ने प्रतिष्ठित कवयित्रियों ने शिरकत की। कविताओं में मुख्यरूप से नारी संवेदना और होली के रंग छाए रहे। मधु शुक्ला ने कविता 'चलो छोड़कर सब जमाने की बातें, करें चांद पर आशियाने की बातें ' गजल सुनाई। वहीं होली गीत 'हल्दियाच सुबहें हुई हैं,कुमकुमी है शाम फागुन आ गया है...'पेश की। इस क्रम में ममता वाजपेयी ने रचना 'प्रेम का पावन मधुर अहसास है नारी रंग में डूबा हुआ अहसास है नारी...' सुनाई। इस क्रम में डॉ. साधना बलवटे ने 'मैं जननी हूं, जगत नहीं हूं, माया का पर्याय नहीं हूं, मैं अंतर की अनुभूति हूं, काया का अध्याय नहीं हूं...कविता पेश की। इस मौके पर अपूर्वा चतुर्वेदी, डॉ. राज श्री रावत , ममता वाजपेयी, मधु शुक्ला, सीमा हरि शर्मा, मंजू मनीषा सहित अन्य रचनाकारों ने पाठ किया।