भोपाल। बुधवार से चैत्र प्रतिपदा से माता रानी की आराधना-उपासना का पर्व नवरात्र शुरू हो जाएंगे। दो अप्रैल तक प्रतिदिन नौ रूपों में देवी मां की पूजा-अर्चना में शहरलीन रहेगा। इस बार यह श्रद्धा-आस्था का पर्व घरों में ही मनेगा, क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लोग मंदिरों में जाने से बच रहे हैं। संक्रमण के चलते कुछ मंदिर समितियों ने मंदिर को आम नागरिकों के प्रवेश पर रोक की सूचना जाहिर कर रही, वहीं कुछ मंदिरों को पूर्ण रूप से बंद कर दिए गए। नेहरू नगर स्थित करूणाधाम मंदिर 31 मार्च तक बंद रहेगा। प्रबंधन ने दरवाजे पर ताला लगा दिया है। इसी प्रकार गुफा मंदिर, सोमवारा चौक स्थित मां भवानी मंदिर, कालीघाट का काली मंदिर, साकेत नगर की पहाड़ी स्थित दुर्गा मंदिर, पटेल नगर स्थित दादाजी धाम मंदिर आदि धार्मिक स्थल भी बंद रहेंगे।
मां चामुंडा दरबार के पुजारी पं. रामजीवन दुबे के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्र पर सर्वार्थ सिद्धि योग है। पांच रवि योग और गुरु पुष्य योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। नवरात्र में माता अपने भक्तों को दर्शन देने नाव पर आ रही हैं। नाव पर माता का आगमन भक्तों के लिए शुभ फलदायी है। गज यानी हाथी पर सवार होकर माता की विदाई होगी। माता का हाथी से गमन होने से अतिवृष्टि का योग बन रहा है। इस वर्ष देश में अच्छी बारिश होने का योग है। चैत्र के महीने में मनाए जाने वाले नवरात्रि के त्योहार को चैत्र नवरात्र के रूप में जाना जाता है। नौ दिनों के उत्सव में परम दिव्य शक्ति की देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री चैत्र नवरात्र के प्रत्येक दिन पूजा करने वाले शक्ति के नौ रूप हैं। यह त्योहार हिंदू कैलेंडर के पहले दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के दौरान हर साल मार्च-अप्रैल के महीने में पड़ता है। इस वर्ष यह 25 मार्च से शुरू होगा और दो अप्रैल को समाप्त होगा।
चैत्र नवरात्रि हिंदु धर्माबलंबियों के लिए खास महत्व रखता है। क्योंकि यह देवी दुर्गा जी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद लेने का सबसे अच्छा समय है। चैत्र नवरात्र के धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों का एक बड़ा प्रतीकात्मक मूल्य है। चैत्र नवरात्र के पहले तीन दिन ऊर्जा की देवी मां दुर्गा को समर्पित है। अगले तीन दिन मां लक्ष्मी को समर्पित हैं, जो धन की देवी हैं। इसके बाद अंतिम तीन दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
तिथि व सूर्योदय के अनुसार सुबह 5.57 से शाम 4ः02 बजे तक कलश स्थापना करें। गुली काल मुहूर्त : सुबह 10.24 बजे से 11.56 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11.31 बजे से 12.20 बजे तक है।
कलश स्थापना और कन्या पूजन का विशेष महत्व
चैत्र नवरात्र में कलश स्थापना के साथ मां की आराधना मंगलकारी है। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, नवग्रह, नदियों, सरोवर, सात द्वीप के साथ देवी-देवताओं का वास माना जाता है। नवरात्र पूजन के दौरान कलश स्थापना कर कलश की पूजा विधि-विधान से करना शुभ माना जाता है। नवरात्र के मौके पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष तक की कन्या पूजन का विधान है। कन्याएं छल-कपट से दूर होने के साथ पवित्र मानी जाती है। जिनका पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
चैत्र नवरात्र 2020 की तिथियां
प्रतिपदा - 25 मार्च बुधवार
द्वितीया - 26 मार्च गुरुवार
तृतीया - 27 मार्च शुक्रवार
चतुर्थी - 28 मार्च शनिवार
पंचमी - 29 मार्च रविवार
षष्ठी - 30 मार्च सोमवार
सप्तमी - 31 मार्च मंगलवार
अष्टमी - 01 अप्रैल बुधवार
नवमी - 02 अप्रैल गुरुवार
दशमी - 03 मार्च शुक्रवार