भोपाल। चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा विधायक दल की बैठक में ही स्पष्ट कर दिया कि पिछली सरकार की गलतियां इस सरकार में नहीं दोहराई जाएंगी।बैठक में उन्होंने तीन सूत्र दिए।
1. शासन करने की शैली में परिवर्तन किया जाएगा । सब मिलकर काम करेंगे । आशय साफ है कि पिछली सरकार में कार्यकर्ताओं की भारी उपेक्षा की गई थी ,जो अब नहीं होगी ।
2. विधायकों की नाराजगी दूर करेंगे - शिवराज के तीसरे कार्यकाल में पूरे वक्त विधायकों की नाराजगी रही । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की समन्वय बैठकों में भी विधायकों ने तत्कालीन सरकार पर ब्यूरोक्रेसी के हावी होने का कई बार आरोप लगाया था ।
3. कोरोना संकट बड़ा संकट-शिवराज ने कहा ,ये वक्त जश्न मनाने का नहीं और न ही सरकार बनने पर पटाखे फोड़ने का है। प्रदेश संकट में है ।हम सब को मिलकर संपर्क की चेन को तोड़ना है ताकि कोरोना को काबू में किया जा सके।
शुरू से ही आश्वस्त दिखे शिवराज
पिछले चार दिनों से मीडिया में भारतीय जनता पार्टी के नए नेतृत्व के कई दावेदारों की खबरें चल रही थीं। कोई केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भावी मुख्यमंत्री बता रहा था तो कोई अन्य नेताओं की ताजपोशी के दावे कर रहा था । दिल्ली में कई नेता मंथन कर रहे थे लेकिन शिवराज के चेहरे पर कहीं कोई शिकन नहीं थी । वे हमेशा ही आश्वस्त जर आए,मानो उन्हें हाईकमान ने पहले ही परिणाम से अवगत करा दिया हो । शिवराज की स्थिति मध्यप्रदेश में परिवार के मुखिया जैसी है । भाजपा परिवार में भी चौहान की मुखिया जैसी ही स्वीकृति है । पिछले एक सप्ताह से जब मप्र में सत्ता संघर्ष चल रहा था तो उन्होंने कई बार ललकार लगाई। आक्रामकता भी दिखाई। सारे बड़े नेता दिल्ली में रणनीति तैयार करते लेकिन शिवराज मप्र में ही पार्टी दफ्तर से लेकर राजभवन तक अपनी भूमिका निभाते रहे। यहीं रहकर रणनीति बनाते रहे। सिंधिया समर्थक बागी विधायकों को जब दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सदस्यता दिला रहे थे तो शिवराज भोपाल में रहकर विधायक शरद कोल के इस्तीफे की उलझन को सुलझा रहे थे । जैसे ही कोरोना के खतरे ने मप्र में दस्तक दी तो उन्होंने कार्यवाहक कमलनाथ सरकार के साथ सेतु की भूमिका में आ गए । रविवार को जब दिल्ली में नेता चयन को लेकर बैठकों का दौर चल रहा था तो शिवराज भोपाल में कोरोना के खिलाफ मोर्चा संभाल रहे थे । नेता चयन की बारी में भी वे एकाग्र बने रहे । पार्अी के प्रति प्रतिबद्ध रहे। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चौहान से दो बार बात की । साफतौर पर संदेश दिया कि वे प्रशासन के संपर्क में बने रहें। इस बातचीत के बाद शिवराज का आत्म विश्वास और भी बढ़ गया था। उनके चेहरे के हावभाव बता रहे थे कि वे जल्द ही चौथी बार मप्र की कमान संभालने वाले हैं।