भोपाल। डैमेज कंट्रोल में जुटी मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार राज्य में भाजपा की कमजोर कड़ी पर आक्रामक हो गई है। इसके लिए पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की एक टीम सक्रिय कर दी गई है। राज्य के दर्जन भर विधायक और पूर्व मंत्री निशाने पर हैं और उनकी घेराबंदी के लिए चक्रव्यूह तैयार किया जा रहा है। खासतौर से सरकार गिराने में सक्रिय नेताओं पर शिकंजा कसा जा रहा है। पिछले तीन दिन से यह प्रक्रिया चल रही है, शनिवार को इसमें और तेजी आ गई। इधर, भाजपा ने सरकार पर बदले की भावना से कार्रवाई का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।
संजय पाठक पर निशाना
विधायक संजय पाठक ने अपनी जान का खतरा बताकर सरकार को घेरने की कोशिश की तो शनिवार को उनके बांधवगढ़ के रिसोर्ट पर प्रशासन ने बुल्डोजर चलवा दिया। इसके पहले कोर्ट के आदेश पर उनके परिवार की सिहोरा स्थित आयरन खदान भी सील कर दी गई थी। संजय पाठक को सरकार ने साधने की कोशिश की, लेकिन वह भाजपा के पक्ष में तनकर खड़े रहे तो उनको तोड़ने के लिए नया हथकंडा अपनाया जा रहा है। सरकार के संकटमोचक कहे जा रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पाठक को अपने मित्र का पुत्र बताते हुए तंज कसा तो पाठक ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। लिहाजा इससे भी थोड़ी खटास बढ़ गई।
नरोत्तम मिश्रा पर शिकंजा
'ऑपरेशन लोटस' के सूत्रधार कहे जाने वाले पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर भी सरकार का शिकंजा कस रहा है। ईओडब्ल्यू की टीम ने शुक्रवार को उनके द्वारा किसानों के नाम पर रतनपुर में खरीदी गई जमीन की दोबारा जांच शुरु कर दी।
पूर्व गृह मंत्री की छानबीन, सारंग के बंगले पर भी नजर
उधर, पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह को भी सरकार ने निशाने पर लिया है। सागर में उनकी संपत्तियों की छानबीन शुरू कर दी गई है। सरकार ने एक और पूर्व मंत्री और राजधानी के विधायक विश्वास सारंग पर भी नजर टिका दी है। सारंग का राजधानी में एक बंगला है, जहां एक शोरूम खोला गया है। आवासीय प्रयोजन की भूमि पर व्यावसायिक उपयोग होने से उन पर तलवार लटकी हुई है। चूंकि यह मामला हाई कोर्ट में लंबित है, इसलिए सीधी कार्रवाई तो नहीं हो रही है, लेकिन विधिक पैरवी तेज कर उनको घेरने की योजना बनी है।
नेताओं ने केंद्र से मांगी सुरक्षा
भाजपा नेताओं का कहना है कि चौतरफा फेल हो चुकी सरकार अब बदले की भावना से कार्य कर रही है। निर्दलीय और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले विधायकों के पक्ष में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर उन्हें केंद्र के स्तर से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। उधर, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के नेतृत्व में भी विधायकों ने राज्यपाल से मिलकर हस्तक्षेप की मांग की है।
बड़ी कार्रवाई का अंदेशा
इस बीच संकेत मिले हैं कि घपलों और घोटालों में घिरे कुछ जनप्रतिनिधियों को घेरने के लिए गवाहों को सक्रिय किया जा रहा है। कुछ खास अफसरों को इसके लिए विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेक्स स्कैंडल से लेकर विभिन्न् घोटालों में कुछ विधायकों को घेरने की भी रणनीति बन गई है। होली बाद इसमें बड़ी कार्रवाई के अनुमान लग रहे हैं। चूंकि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस दो सीटों पर अपनी बढ़त बनाना चाहती है, इसलिए भी वह साम, दाम, दंड और भेद का हर अस्त्र इस्तेमाल करने में जुटी है।