दतिया। आज से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इसके साथ ही गुड़ीपडवा यानि नव संवत्सर की भी आज से शुरूआत होगी। हिन्दू धर्म में नवसंवत्सर को ही नववर्ष के रूप में मनाने की परंपरा है। इस दिन से चैत्र नवरात्र भी प्रारंभ होती है। इस दौरान पूरे नौ दिन भक्त देवी आराधना में लीन रहते हैं, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण शहर सहित अंचल भर के सभी प्रमुख देवी मंदिरों के पटबंद रहेंगे। जिसके चलते भक्तों व साधकों को अपने घर बैठकर ही देवी आराधना करना होगी। करीब एक सप्ताह पूर्व ही दतिया स्थित शक्तिस्थल पीताम्बरा पीठ, विजयाकाली पीठ बड़ी माता मंदिर सहित रतनगढ़ माता मंदिर, खैरीमाता दरबार, रामगढ़ वाली माता मंदिर के पट कोरोना वायरस के कारण बंद करा दिए गए हैं। ताकि नवरात्र के दौरान मंदिरों में भक्तों की भीड़ न लगे और लोगों का वायरस से बचाव हो।
इस बार सूने रहेंगे मां के दरबार
कोरोना वायरस के प्रति सतर्कता बरतते हुए प्रशासन ने नवरात्र से 7 दिन पूर्व ही सभी प्रमुख देवी मंदिरों को बंद करा दिया था। ऐसा पहली बार होगा जब माता के दरबार में भक्तों की चहल पहल नजर नहीं आएगी। दतिया नगर की कुलदेवी के रुप में प्रसिद्ध विजया काली पीठ बड़ी माता मंदिर पर रियासतकाल से लगते आ रहे मेले के आयोजन को भी रद्द कर दिया गया है। करीब दो सौ साल की यह परंपरा पहली बार तोड़ी गई है। जिसके कारण मां का दरबार सूना रहेगा। वहीं प्रसिद्ध पीताम्बरा पीठ पर भी भक्तों की आवाजाही बंद रहेगी। इधर शहर से पांच किलोमीटर दूर स्थित खैरी माता मंदिर के पट भी बंद करा दिए गए हैं। भांडेर स्थित रामगढ़ माता मंदिर भी आगामी आदेश तक बंद रहेगा। इन सभी मंदिरों के बंद रहने के कारण भक्तों व साधकों से अपने घर बैठकर ही आराधना करने का आग्रह किया गया है। जबकि पीताम्बरा पीठ पर तो देश के कोने-कोने से साधक पहुंचकर मां की आराधना करते थे। उन्हें भी घर पर ही साधना करने की पीठ प्रबंधन द्वारा समझाइश दी गई है।
रतनगढ़ माता पर भी नहीं गूजेंगे जयकारे
वहीं अंचलभर में आस्था के केंद्र रतनगढ़ माता दरबार में भी भक्त नहीं पहुंच सकेंगे। प्रशासन ने यहां भी सतर्कता बरतते हुए कोरोना से बचाव के लिए पहले ही माता मंदिर पर भक्तों के आने पर रोक लगा रखी है। ऐसे में नवरात्र के दौरान यहां भी दूरदराज से पहुंचने वाले भक्तों का आना प्रतिबंधित रहेगा। इस रोक से अनजान कुछ ग्रामीण अपने ट्रैक्टर ट्राली से सोमवार को भी मां के दर्शनों के लिए निकले थे, जिन्हें पुलिस ने रास्ते में रोककर बैरंग वापिस लौटाया।
चैटीचांद समारोह भी हुआ स्थगित
सिंधी समुदाय के पूज्य भगवान झूलेलाल की जयंती पर आयोजित चैटीचांद महोत्सव भी समाज ने स्थगित कर दिया है। इस दिन दांतरे की नरिया स्थित मंदिर पर भगवान झूलेलाल का अभिषेक, पूजा अर्चना, भंडारे के साथ नगर में चल समारोह निकाला जाता रहा है। लेकिन कोरोना वायरस को देखते हुए यह धार्मिक आयोजन भी निरस्त कर दिया गया है। समाज के लोगों को भगवान झूलेलाल की एक सैकड़ा से ज्यादा मिट्टी की मूर्तियां घर पर पूजन करने के लिए सिंधी पंचायत द्वारा वितरित कराई गई है।