आबादी ज्यादा, संसाधन कम, हर व्यक्ति अपने दरवाजे पर चाहता है सैनिटाइजेशन

ग्वालियर। नगर निगम प्रशासन ने फॉगिंग और सोडियम हाइपो क्लोराइड दवा का छिड़काव तेज कर दिया है। इसके लिए एक सैकड़ा से ज्यादा सफाई कर्मचारी और आधा सैकड़ा मशीनें लगाई हैं। शहर में कहीं कचरा नजर न आए, इसके लिए नियमित झाड़ू भी लगवाई जा रही है। इस कवायद के बाद भी शहर में कई जगह कचरे के ढेर देखे जा सकते हैं। जहां मशीनें नहीं पहुंच रही हैं वहां लोग नगर निगम को कोस रहे हैं। निगम प्रशासन के सामने परेशानी यह है कि शहर में 2 लाख से ज्यादा घर और आबादी करीब 14 लाख है। हर आदमी अपने दरवाजे को सैनिटाइज कराना चाहता है, किन्तु निगम प्रशासन पर संसाधनों की कमी है। फिर भी प्रशासन की कोशिश है कि पहले चरण में शहर के उन स्थानों को सैनिटाइज कर दिया जाए जहां भीड़ ज्यादा रहती है।


आधा सैकड़ा लगी मशीनें


वर्तमान में हर आदमी को मास्क और सैनिटाइजेशन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कोरोना वायरस से बचाव का यह सबसे कारगर हथियार माना जा रहा है। देश में जिस तरह मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, उससे हर व्यक्ति चिंतित है और मास्क व सैनिटाइजेशन पर फोकस कर रहा है। मार्केट से दोनों चीजें लगभग गायब सी हो गई हैं। इसी बीच निगम प्रशासन ने सैनिटाइजेशन का काम शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया व समाचार पत्रों में इसकी तस्वीरें प्रकाशित हो रही हैं। इसलिए शहर के लोग निगम की ओर ताक रहे हैं। निगम प्रशासन ने करीब आधा सैकड़ा मशीनें फॉगिंग तथा सैनिटाइजेशन में लगा दी हैं। लेकिन यह संख्या पर्याप्त नहीं है। जिस क्षेत्र में यह मशीनें पहुंच रही हैं वहां लोग बाहर निकलकर अपने घर पर सैनिटाइजेशन की जिद करते हैं। इस पर विवाद भी होने लगे हैं। निगम प्रशासन के लोगों को भरोसा दिलाया है कि वे संयम से काम लें। जहां तक संभव हो सकेगा, निगम प्रशासन सैनिटाइजेशन का प्रयास करेगा।


 

कचरा लेने हर वार्ड में नहीं पहुंच रहे वाहन


दफ्तरों में छुट्टी घोषित कर दी है तो लॉक डाउन के कारण सड़कों पर सन्नााटा है। इसलिए दुकानों का कचरा सड़क पर नहीं आ रहा। घरों का कचरा लेने यदि वाहन नहीं पहुंच रहे तो लोग उसे बाहर फेंक रहे हैं। पहले तो लोग 2-3 दिन तक कचरे को घरों में रखे रहते थे, लेकिन वायरल इन्फेक्शन के डर से वे अब कोई रिस्क लेना नहीं चाहते। इसलिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन वाहन नहीं आने पर वे उसे बाहर फेंक देते हैं। नगर निगम अधिकारी हालांकि पूरी कोशिश कर रहे हैं कि ईको ग्रीन और विभाग के वाहन नियमित रूप से वार्डों में पहुंचे। लेकिन ईको ग्रीन की ध्वस्त व्यवस्थाएं इस काम में परेशानी बनी है। कंपनी के वाहन हर वार्ड में नहीं पहुंच रहे।