सादगी, शिक्षा एवं समाजसेवा के पर्याय रहे परमपूज्य श्री रामप्रसाद त्रिपाठी जी के जीवन के अध्याय का समापन हुआ

सादगी, शिक्षा एवं समाजसेवा के पर्याय रहे परमपूज्य श्री रामप्रसाद त्रिपाठी जी के जीवन के अध्याय का समापन हुआ


भाण्डेर । नगर के प्रतिष्ठित एवं वयोवृद्ध समाजसेवी, सादगी,शिक्षा एवं निष्ठा के पर्याय एवं जीवन पर्यन्त त्याग की प्रतिमूर्ति रहे परमपूज्य पं.श्री रामप्रसाद जी त्रिपाठी जिनके सानिध्य में नगर का सर्वप्रिय, शिक्षोन्मुखी *गायत्री विद्यालय सिकंदरपुर भाण्डेर* की आधारशिला रखी गई थी। नगर के सर्वहारा वर्ग की पहली पसंद हमेशा गायत्री विद्यालय ही रहा है। श्री त्रिपाठी जी का उद्देश्य मानव समाज के उस अन्तिम पंक्ति के व्यक्ति तक शिक्षा पहुचाना था जो निरीह गरीब एवं अपनी समस्या को मुखर न कर पाने बाले होते थे। बिगत 25 वर्षो से अनवरत यह विद्यालय संचालित होरहा है जोकि अब नगर का सर्वोत्कृष्ट विद्यालयों में से एक है। जहॉ सर्वाधिक विद्यार्थियों की संख्या हैं। जिसके संचालक उनके सुपुत्र श्री नरेन्द्र त्रिपाठी जी कर रहे हैं। इस विद्यालय के कारण उन्हें शिक्षा संजीवनी से अलंकृत किया जावे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। 


ऐसे समाजसेवी एवं शिक्षाविद्, शिक्षा संजीवनी परमपूज्य श्री रामप्रसाद त्रिपाठी जी बहुत सहज एवं सरल व्यक्तित्व के धनी थे। इनके पिता स्वर्गीय श्री मथुरा प्रसाद जी तिवारी संगीत प्रेमी ऱहे। एवं नगर के प्रमुख समाजसेवियों मे से एक थे। परमपूज्य मथुरा प्रसाद त्रिपाठी जी एक बड़े बट वृक्ष के रूप में थे। जिनके दो बेटों मे श्री रामप्रसाद त्रिपाठी (बाबूजी)ज्येष्ठ पुत्र थे एवं पं श्री लक्ष्मीनारायण जी त्रिपाठी (उल्लन)लघु पुत्र के रूप थे। खास बात तो यह है कि दोनों भाई नगर के प्रमुख समाजसेवी एवं शिक्षाविद् रहे। श्री त्रिपाठी जी के प्रपौत्र मंचल त्रिपाठी एवं चंचल त्रिपाठी भी अपने पूर्वजों के इस सामाजिक दायित्व का बखूबी निर्वाहन करते आरहे है।


ऐसे महान व्यक्तित्व से ओतप्रोत श्री त्रिपाठी जी 90 वर्ष तक हम सबका भाण्डेर वासियों का मार्गदर्शन करते रहे परन्तु अब वह इस दुनिया में नहीं हैं।परन्तु इनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व हमेशा अमर रहेंगे। हमेशा हम सबका मानव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में छोड़ी गई विरासत हमेशा अमर रहेगी। 


दिनॉक 14 फरवरी 2020 को श्री रामप्रसाद त्रिपाठी जी की अंतिम यात्रा मे विशाल जन दर्शन हुये। सैकड़ों लोग उनकी अन्तिम यात्रा में शामिल हुये। बड़ी संख्या मे लोगों ने उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किये। लगभग 700 मीटर लम्बा काफिला उनकी लोकप्रियता एवं उनके परिवार के प्रति लोगों की सद्भावना को स्पष्ट कर रहा था।यकीनन मेंने कुछ एक विशिष्ट अवसरों पर ही इतने विशाल जन सैलाब देखे हैं। ऐसा लग रहा था जैसे परमपूज्य श्री त्रिपाठी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने बालों की भीड़ में दुःख कही खो गया हो।