पुलवामा आतंकी हमला: 45 जवान शहीद हुए और तमाम सवाल आज भी ज़िन्दा है
पुलवामा। हमले को आज 1 साल हो गया , इस हमले में सीआरपीएफ के 45 जवान शहीद हुए थे पर इसे लेकर तमाम सवाल आज भी ज़िन्दा है। देश की जनता के दिल दिमाग में बैठे इन सवालों का जवाब भी देने की कोशिश नहीं की गयी। यह मामला आज भी संदिग्ध बना हुआ है और तमाम शक की गुंजाईश बनी हुई है।
दरअसल , देश की सरकारों को अपनी नाकामी छुपाने के लिए एक "शिखंडी" मिला हुआ है , देश की सुरक्षा में जब भी चूक होती है सरकारें अपनी जवाबदेही से बचने के लिए उसी "शिखंडी" के पीछे जाकर छिप जाती हैं।
यह शिंख॔डी है पाकिस्तान , हर आतंकी हमले की तरह पुलवामा हमले पर भी पाकिस्तान को कोस कर , उस पर आरोप लगाकर या बालाकोट की छोटी मोटी कार्यवाही करके इतिश्री कर ली गयी , और पुलवामा के मास्टरमाइंड के नाम पर कुछ लोगों को मारकर मामला खत्म कर दिया गया , यद्धपि मोदी सरकार इसी कारण फिर चुन ली गयी।
सवाल है कि जाँच कब हुई , वह सबूत और साक्ष्य कहाँ हैं जिससे पुलवामा को लेकर सभी जवाब स्पष्ट रूप से देश के सामने आए।
पुलवामा धमाके में पाकिस्तान दोषी है तो हमारे 45 जवानों के बदले बालाकोट में कुछ पेड़ और परिंदे मार कर आप देश को संतुष्ट नहीं कर सकते। पुलवामा के शहीदों को श्रृद्धांजली