जयपुर। राजस्थान सरकार की वित्तीय हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि राजस्थान रोडवेज के रिटायर्ड 4 हजार से अधिक कर्मचारियों के सेवानिवृति परिलाभ उपार्जित अवकाश, 5-6 व वेतनमान एरियर, अधिश्रम भत्ता आदि का भुगतान बकाया है। राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि राज्य सरकार पिछले एक वर्ष से रोडवेज के घाटे को कम कने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होेंने कहा कि रोडवेज घाटे से उबरने तथा कर्मचारियों को समय पर वेतन देने के लिए सरकार कार्य कर रही है। उन्होेंने कहा कि पिछले 12-15 सालों से सहारा नाम की कंपनी को प्रति महिने में 1 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रेक्ट दिया जा रहा था जिससे सीधा भ्रष्टाचार हो रहा था। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने आते ही उसका ठेका निरस्त कर दिया जिससे सरकार को एक करोड़ रुपये की बचत हुई है।
खाचरियावास ने बताया कि पहले रोडवेज राष्ट्रीयकृत मार्गों पर चलती थी जिसे गत सरकार द्वारा बंद कर दिया गया तथा लोक परिवहन सेवा को राष्ट्रीयकृत मार्ग पर शुरू किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने आते ही 10 दिनों में ही लोक परिवहन सेवा की बसों को राष्ट्रीयकृत मार्गों के परमिट पर रोक लगा दी तथा लोक परिवहन सेवा की बसों को कोई नया परमिट नहीं दिया । उन्होंने यह भी बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने सभी राष्ट्रीयकृत मार्गों को अराष्ट्रीयकृत मार्ग कर दिया था, जिसे हमारी सरकार ने आते ही वापस इन मार्गों को राष्ट्रीयकृत मार्ग कर दिया है। उन्होंने बताया कि इन सब निर्णयों से अक्टूबर तथा दिसंबर महिने में पहली बार रोडवेज फायदे में भी आई है।
इससे पहले खाचरियावास ने विधायक बृजेन्द्र सिंह ओला के मूल प्रश्न का जवाब देते हुए बताया कि राजस्थान राज्य परिवहन निगम के सेवानिवृत कर्मचारियों के सेवानिवृति परिलाभ यथा उपादान राशि, उपार्जित अवकाश, 5-6 व वेतनमान एरियर, अधिश्रम भत्ता आदि का भुगतान बकाया है । उन्होंने बताया कि 4 हजार 103 कार्मिकों के सेवानिवृति परिलाभ बकाया है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान परिवहन निगम की रोकड़ तरलता की स्थिति अनुकूल होने पर बकाया परिलाभों का भुगतान किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि झुन्झुनू आगार के अप्रैल 2015 से जून 2016 तक के कर्मचारियों को सेवानिवृति परिलाभों का भुगतान किया जा चुका है। खाचरियावास ने उनकी सूची तथा जुलाई 2016 के पश्चात सेवानिवृत अधिकारियोंध्कर्मचारियों का नामवार, पदवार तथा उनके बकाया भुगतान का विवरण सदन के पटल पर रखा